ये सूरज और ये चाँद, सभी के लिए एक समान हैं, जैसे सूरज की रोशनी, दिन की मेहमान है, वैसे ही चाँद की चाँदनी, रातों की मेज़बान है, जितनी तेरे लिए ये ज़रूरी हैं, उतनी ही मुझपे भी मेहरबान हैं, हम सभी के ऊपर, एक जैसा, एक बराबर, वो विशाल आसमान है, ये तेरी और मेरी, जात के मतभेद से, पूर्ण रूप से अनजान है, तेरा अन्नदाता भी वही रब है, जो मेरे लिए मेरा भगवान है, तू जिस मिट्टी का पुतला है, उसी मिट्टी के बने हम भी इंसान हैं, लेकिन फिर भी, ना जाने क्यूँ.... मैं हूँ ग़रीब, और तू धनवान है ! आज तुझसे ज़्यादा अख़बारों में, मेरे ही चर्चे और कहानियाँ हैं, तू मुझे रोज़ देखता है, मेरे चेहरे हज़ार हैं, तू सुबह अपने भोजन को, पचाने के लिए दौड़ता है, यहाँ दो दिनों से बिना कुछ खाए, मेरे बच्चे बीमार हैं , तू इमारतों में बैठ कर, बरसात का मज़ा लेता है, यहाँ मेरा परिवार, हर मौसम, बिना छत के, सड़कों पे सवार हैं !! तू विमान और जहाज़ों में, सफ़र करता है, और, मेरी जेब में मात्र पैसे चार हैं, बड़ी बड़ी गाड़ियों में बैठ के भी, तू प्रदूषण से हैरान है, मेरे लिए ये मिट्टी, खेत और खलिहान, यही मेरा जहान हैं !! तेरे पु...