बूझो तो जानें !


नहीं नहीं ,
मैं कोई पहेली या खेल नहीं,
ना ही कोई सवाल हूँ,
मैं तो यहीं हूँ,
सदियों से,
तेरे इर्द गिर्द,
पर अब शर्मसार हूँ !😓

मैं तुझे पसंद करूँ,
यही बात तुझे पसंद आए,
तेरी हर वक्त तारीफ़ करूँ,
ऐसी तू इच्छा जताए ,
बुराई ना तेरी मुझ तक पहुँचे,
इसका तुझको डर सताए !

अग़ल की, बग़ल वालों की,
आगे की, पीछे वालों की,
जासूसी तेरे मन को भाए ,
आस-पड़ोस की हर खबर,
सुनने को तू कान फैलाए,
पर अपने चार दीवारों में,
है बुन रही जो रणनीति,
चूँ भी ज़रा सी बाहर ना जाए,
आवाज़ों को धीमा कर के,
घर के पर्दे तू गिराए !

अपनी अच्छी पहचान बनाने,
उठने बैठने घर घर जाए,
खीर पूड़ी पकवान खिला कर,
राज सबके तू खुलवाए,
मीठे मीठे पान लगा कर,
कहीं का सुन, कहीं बतलाये,
इसकी टोपी उसको पहनाकर,
खुद खामोशी से आनंद उठाए !

मेरे बीच इज्जत बढ़ाने,
ना जाने कितने ज़ोर लगाए,
नए नए कपड़े, सोना ज़ेवर,
चाँदी से तू शान बढ़ाए,
बंगला गाड़ी की तस्वीरों से,
सोशल मीडिया भर भर जाए,
किसी से कम ना आँका जाऊँ,
दौड़ में शामिल तू घबराए !

अपनी उन्नति के चर्चों का,
घर घर जाकर ढोल बजाए,
तू टांग पकड़ के उसकी खींचे,
जो तुझसे ऊँची धाक जमाए,
तारीफ़ों के पुल उसके बांधे,
जो तेरे आगे बीन बजाए,
सम्बन्धों के गलियारों में,
अपने ही अपने राग सुनाए,
अपने सुख में खुश ना रहकर,
औरों के दर्द की खिल्ली उड़ाए !

नहीं पहचाना ??

ऐ नर , ऐ मानुष, 
मैं तुझसे ही घिरा हूँ,
मैं तुझमें ही बसा हूँ,
तूने ही मुझे पैदा किया और 
तूने ही मुझे बनाया है,
अच्छे और बुरे विचारों से,
तूने ही मुझे पिरोया है !
मुझमें बदलाव लाने को,
तुम्हें खुद को बदलना पड़ेगा,
मुझको सुधारना चाहते हो तो,
तुम्हें खुद को सुलझाना होगा !

मैं था कल ,
मैं हूँ आज ,
मैं हूँ तेरे इर्द गिर्द,

मैं हूँ तेरा “समाज” !!!

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~ shubh 🐰

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