कौन पराया, कौन सगा ?


सभी बहुत ख़ुश थे ,
जब पता चला कि बेटा हुआ है ,
पूरे गाँव में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी,
मिठायियाँ बटने लगीं ,
सभी लोग बच्चे की एक झलक पाने के
लिए उत्साहित थे,
दादी की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा,
अब तेरे सारे ख़्वाब पूरे कर देगा ये ,
-दादी ने बच्चे की माँ से कहा !
सभी उस बच्चे की सेवा में लग गए,
सभी प्रकार की सुख सुविधाएँ,
उसके आस पास थीं !
बच्चा थोड़ा बड़ा हुआ ,
अच्छी शिक्षा और संस्कार से सुसज्जित,
ज़िंदगी में आगे बढ़ा, 
वह यह नहीं जानता था की ,
इच्छाओं से भरपूर उसके सभी सगे सम्बन्धी ,
अपने अपने ख़्वाबों की उम्मीद सजा के बैठे थे,
हर एक ने अपनी ख़्वाहिशों को उसके सामने ,
अलग अलग अन्दाज़ में पेश किया,
बेटा बड़ा हो के सरकारी अफ़सर बनेगा,
अरे नहीं नहीं, वो तो डॉक्टर बनेगा,
मेरे लिए बंगला बनवाएगा,
बड़े बड़े देशों की सैर कराएगा......
लड़का सुनता सभी की ,
और सबकी खुशी के लिए,
हाँ में हाँ भी मिलाता,
किसी को दुखी नहीं होने देता,
तमाम उम्मीदों के बोझ तले,
दिल को बहलाता , समझाता,
और आगे बढ़ता जाता,
कभी ख़ुश रहता, तो कभी उदास हो जाता,
आख़िर किस किस की पूर्ति करता ,
किस किस को भूल जाता ,
किसके सपने निखारता,
और किसके बिखर जाने देता ?
उसे कुछ भी समझ नहीं आया !
समय गुजरता गया,
लोग मिलते गए, बिछड़ते गए,
कुछ ठहर गए,
कुछ बिखर गए, 
पूछा ना किसी ने भी लड़का क्या चाहता है..
हैरानी की बात है, 
सभी को वो बस अपने मतलब से प्यारा था !
फिर एक वक्त जब उसने,
अपने दिल का हाल बतलाना चाहा,
वो क्या चाहता है,
ये सुनाना चाहा,
चहकती हुई महफ़िल में खामोशी सी छा गयी,
सबकी साँसें मानो एक पल के लिए थम सी गयी,
जो अपना कहते थे,
वो बेवफ़ा हो गए,
जो सुन न सके,
सारे दफ़ा हो गए,
और जो कुछ रुके रहे,
वो भी ख़फ़ा हो गए!!
आक्रोश से भरे थे,
पर कुछ कह ना सके,
अपनी उम्मीदों के टूटने के शोर में,
सही ग़लत भूल गए,
आख़िर धीरे धीरे..
सब उससे दूर हो गए ..... !
वक्त बदला,
लड़का बढ़ता गया,
गाँव को छोड़, शहर की ओर,
थामकर अपने सपनों की डोर,
आँखों में ख़्वाब लिए,
अपनी मंज़िल की ओर,
मेहनत की, बहुत की,
हाँ, वक्त लगा,
पर सफल हुआ,
नाम हुआ,
सम्मान मिला,
शोहरत मिली..
गाँव में खबर पहुँची,
लोगों में चर्चा हुयी,
कोई कहता कि वो मेरा भतीजा है,
तो कोई कहता मेरा भांजा है,
कोई उसे अपना ख़ास बताता,
तो कोई अपना पड़ोसी बोलता,
अचानक से सब कुछ बदलने लगा,
उसके वापस आने का सब इंतज़ार करने लगे,
ख़ुशियाँ बाँटने लगे,
दर्द भुलाने लगे !

यह सब देख ,
गाँव का सबसे पुराना,
बरगद का पेड़ ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा,
और ‘वक्त’ से उसने एक सवाल किया,
कि अब तू बता-
इस मतलब कि भीड़ में,
अब “कौन पराया और कौन सगा ??”

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~ shubh 🐰

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